श्रद्धा नर्सिंग होम संचालित हो रहा नर्सों के भरोसे, नहीं है कोई महिला डॉक्टर जिसकी चर्चा आम स्वास्थ्य विभाग मेहरवान

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श्रद्धा नर्सिंग होम संचालित हो रहा नर्सों के भरोसे, नहीं है कोई महिला डॉक्टर जिसकी चर्चा आम स्वास्थ्य विभाग मेहरवान

महिला मरीजों को नर्सिंग होम में ले जाने पर दिया जा रहा मोटा कमीशन जिसकी चर्चा गांव-गांव गली-गली

श्रद्धा नर्सिंग होम संचालक के सीएमओ से हैं बेहतर संम्बंध इस लिए स्वास्थ्य सेवाओं से किया जा रहा खिलवाड़

 

रिपोर्ट-शादाब खान,पीलीभीत

पूरनपुर/पीलीभीत
नगर में बिना डॉक्टर के नर्सिंग होम का संचालन स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी से किया जा रहा है। वहीं बताया जाता है कि ओपीडी भी बिना डॉक्टर के ही की जा रही है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि नर्सिंग होम के बोर्ड पर ऊंची ऊंची डिग्री धारक डॉक्टरों के नाम भी छपवाए गए हैं। लेकिन नर्सिंग होम में कौन डॉक्टर मिलेगा इसकी जानकारी किसी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को नहीं है। वहीं तहसील कलीनगर और पूरनपुर क्षेत्र की सरकारी अस्पताल की स्वास्थ्य बर्करों द्वारा नर्सिंग होम में मरीजों को पहुंचाने पर मोटा कमीशन भी परोसा जा रहा है। वहीं इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को भी है लेकिन नर्सिंग होम संचालन कर्ता के साथ बेहतर संम्बंध हैं तो कार्यवाही का कोई डर भला कैसे सम्भव हो सकता है। नगर पूरनपुर में स्वास्थ्य विभाग की मिली भगत के चलते अनगिनत नर्सिंग होम बिना कुशल डॉक्टरों के संचालित हो रहे हैं। वहीं इन नर्सिंग होम में मरीजों को पहुंचाने में अहम भूमिका सामुदायिक स्वास्थ्य केंन्द्र में तैनात स्वास्थ्य बर्करों की है। जहां उनको मरीज भेजने के नाम पर मोटा कमीशन परोसा जा रहा है। नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंन्द्र में जब महिला प्रसव को लेकर सेवाएं दी जा रही हैं। वहीं गांव देहात की स्वास्थ्य बर्कर गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण सहित अन्य जांचे भी सरकारी अस्पताल में लाकर समय से करवा देती हैं। लेकिन गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान बड़ी परेशानी न ऊठानी पड़े इसके लिए गर्भवती महिला तथा उसके परिजनों को स्वास्थ्य वर्करों तरह तरह की परेशानियां ऐन मौके पर गिनाकर उनको प्राईवेट नर्सिंग होम में ले जाने की सलाह और सलाह देते देते उनको नर्सिंग होम में भर्ती कराने और बेहतर सेवाओं तक की खूबियों के बारे में बताकर उनको सरकारी अस्पताल में परेशानियां गिना कर प्राईवेट नर्सिंग होम की तरफ इशारा कर देती हैं। जहां स्वास्थ्य बर्करो का नगर के नर्सिंग होम में पहले से ही कमीशन खोरी को लेकर सांठगांठ है। वहीं बड़े आपरेशन करने को धाक में बैठे नर्सिंग होम संचालक स्वास्थ्य बर्करों को पांच से छ: हजार तक का कमीशन परोसने का लालच की चर्चाएं अब आम हो गई हैं। इसी के चलते स्वास्थ्य बर्करों का मोटी कमीशन के साथ साथ बड़ी आमदनी के स्रोत नर्सिंग होम बने हुए हैं। वहीं नगर से लेकर गांव देहात की स्वास्थ्य बर्करों को सरकारी अस्पताल में महिला का प्रसव करवाने को लेकर प्रति महिला प्रसव के तौर पर नाम मात्र का मानदेय मिलता है। वह भी छ: माह से लेकर एक बर्ष बीत जाए कब मिले इसका कोई पता भी नहीं है। लेकिन सरकारी अस्पताल की सेवाओं के प्रति गर्भवती महिलाओं को बेहतर न बताकर उनको प्राईवेट अस्पताल या नर्सिंग होम में भर्ती करवाकर उनका बड़े आपरेशन से प्रसव कराने पर स्वास्थ्य बर्करों को पांच से छ: हजार तक का कमीशन नर्सिंग होम संचालक मरीज की छुट्टी होने के उपरांत तत्काल भिजवाने का कार्य करने से बाज नहीं आ रहे हैं। इसको लेकर पूर्व में कई नर्सिंग होम या अस्पतालों में छापेमारी अभियान भी चलाया गया लेकिन स्वास्थ्य विभाग की सरपरस्ती के चलते उनके ताले रातोंरात लटकाने के बाद भी खोल दिए गए। वहीं चर्चा यहां तक की है कि नगर का श्रद्धा नर्सिंग होम इन दिनों स्वास्थ्य बर्करों को गर्भवती महिलाओं को बड़े आपरेशन से प्रसव कराने बाली स्वास्थ्य बर्कर को मोटा कमीशन बांटने की चर्चा आम होती जा रही है। वहीं इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग श्रद्धा नर्सिंग होम की तरफ आंख उठाकर देखने तक को तैयार नहीं है जिसकी चर्चा अब गांव-गांव गली-गली होने लगी है। पूरनपुर के श्रद्धा नर्सिंग होम ने प्रसव वाली महिलाओं को आपरेशन लिए लाने पर कमीशन बांटकर डाली प्रथा जिसकी चर्चा गांव-गांव गली-गली, श्रद्धा नर्सिंग होम संचालक मरीजों को प्रसव बाली महिलाओं को नर्सिंग होम में लाने को लेकर मोटा कमीशन बांटने की चर्चा अब आम होती जा रही है। वहीं चर्चा यहां तक है कि नर्सिंग होम में इन दिनों कोई महिला कुशल डॉक्टर भी नहीं हैं। जिसको लेकर ओपीडी केवल नर्स के माध्यम से ही की जा रही है। जहां श्रद्धा नर्सिंग होम के संचालन कर्ता के जनपद के सीएमओ से बेहतर संम्बंध होने के चलते उनपर कार्यवाही सम्भव ही नहीं है इसकी भी चर्चा अब आम है। नगर में बीते सालों में पहले चुनिंदा अस्पताल व नर्सिंग होम हुआ करते थे। लेकिन पहले ऐसा नहीं था कि मरीज को सरकारी अस्पताल से बरगला कर उसको प्राईवेट अस्पताल या नर्सिंग होम में धकेल दिया जाता हो। वहीं अब गांव गांव स्वास्थ्य बर्करों तथा विभाग से ताल्लुक रखने बाले बर्कर मोटी कमीशन लेने के चक्कर में प्रसव बाली महिला का बड़ा आपरेशन करवाने तथा उस नर्सिंग होम से मोटा कमीशन लेकर मरीज के साथ जिंदगी मौत का खेल अब मिजाज बन बैठा है। जिसकी गांव देहात में चर्चाएं आम हो गई हैं। वहीं गांव देहात के पढ़े लिखे लोग इनके चक्कर में ना आकर सरकारी अस्पताल से मना किए जाने पर अपने बिवेक से कुशल डॉक्टर्स का सहारा लेते हैं। लेकिन अनपढ़ और गरीब अभी भी स्वास्थ्य बर्करों के माध्यम से मोटी कमीशन बांटने बाले श्रद्धा नर्सिंग होम का सहारा लेने से बाज नहीं आ रहे हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग चांहे नर्सिंग होम पर कार्यवाही करे या न करे लेकिन नगर से लेकर गांव क्षेत्र में गर्भवती महिला को प्रसव कराने को नर्सिंग होम ले जाने पर मोटा कमीशन दिए जाने की चर्चा आम बात हो गई है।

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