जनपद श्रावस्ती में अवैध बालू खनन का मामला एक बार फिर चर्चा में है। आरोप है कि बालू खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे बिना किसी भय के खुलेआम खनन करा रहे हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर इन्हें किसका संरक्षण प्राप्त है और ये इतने बेखौफ क्यों हैं।
इस पूरे मामले से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति स्वयं अवैध खनन से जुड़ी जानकारी देता हुआ दिखाई दे रहा है। इस वीडियो को हमारे चैनल के माध्यम से अंत में दिखाया जाएगा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह मामला उत्तर प्रदेश के जनपद श्रावस्ती के विकास खंड गिलौला अंतर्गत दुल्हिया रोड, रामनगरा गांव का बताया जा रहा है। आरोप है कि यहां खनन अधिकारी के संरक्षण में अवैध बालू खनन कराया जा रहा है। बताया जा रहा है कि खुशीराम और घनश्याम नामक ठेकेदार इस अवैध खनन में संलिप्त हैं।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि कथित तौर पर इन ठेकेदारों ने स्वयं यह स्वीकार किया है कि उन्होंने खनन अधिकारी को एक लाख रुपये दिए हैं, जिसके चलते वे बेखौफ होकर बालू खनन करा रहे हैं। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला बेहद गंभीर है और प्रशासन के लिए बड़ा सवाल खड़ा करता है।
मामले को लेकर मीडिया द्वारा खनन अधिकारी से दूरभाष पर संपर्क किया गया। खनन अधिकारी ने बताया कि जिस स्थान पर खनन हो रहा था वहां गार्ड की तैनाती करा दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि वहां बालू नहीं बल्कि मिट्टी का खनन हो रहा था, जो किसी व्यक्ति के घर निर्माण के लिए ले जाई जा रही थी।
हालांकि, वीडियो फुटेज और मीडिया की पड़ताल में स्पष्ट रूप से बालू खनन होता हुआ दिखाई दिया। मौके की जांच में यह भी सामने आया कि वहां मिट्टी नहीं बल्कि बालू का ही खनन किया जा रहा था। ऐसे में खनन अधिकारी के बयान पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इसके अलावा, जिन ठेकेदारों द्वारा खनन अधिकारी को एक लाख रुपये देने का आरोप लगाया गया है, उनके नाम भी उजागर हो चुके हैं, इसके बावजूद न तो उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई की गई और न ही किसी प्रकार की जांच शुरू की गई है।
इस पूरे प्रकरण ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं और वे खुलेआम अधिकारियों पर धन लेने के आरोप क्यों लगा रहे हैं। अब आवश्यकता है कि प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराए तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।












