कानपुर में सवर्ण समाज लामबंद यूजीसी काले कानून और आरक्षण के विरोध में बना ‘सवर्ण एकता मोर्चा। 1 सितंबर को राष्ट्रपति को देंगे ज्ञापन
यूजीसी कानून के खिलाफ सवर्णों में उबाल: कानपुर में क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य, कायस्थ समाज एक मंच पर, बोले – आर्थिक आधार पर हो आरक्षण
कानपुर। वर्तमान में प्रस्तावित यूजीसी कानून के विरोध में और आरक्षण को आर्थिक आधार पर लागू करने की मांग को लेकर सवर्ण समाज ने एक बड़ा मोर्चा बनाया है। कानपुर में हुई एक संयुक्त प्रेस वार्ता में सवर्ण एकता मोर्चा के गठन का ऐलान किया गया। प्रेस वार्ता में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज कुमार सिंह भदौरिया और सर्व ब्राह्मण विकास परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. कमल किशोर अवस्थी ने संयुक्त बयान दिया। इस दौरान वैश्य एकता परिषद, कायस्थ महासभा सहित सवर्ण समाज के कई अन्य संगठनों के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यूजीसी जैसा काला कानून हमारे बच्चों के भविष्य के लिए खतरा है। इससे शिक्षा बाधित और प्रभावित होगी। इसलिए हम सभी सवर्ण संगठन इस कानून का प्रबल विरोध करते हैं। साथ ही उन्होंने मांग की कि आरक्षण की समीक्षा होनी चाहिए और जातिगत आरक्षण खत्म कर आर्थिक आधार पर सामाजिक न्याय के तहत सभी समाज के गरीबों को आरक्षण मिलना चाहिए। सवर्ण एकता मोर्चा ने ऐलान किया कि आगामी 1 सितंबर दिन मंगलवार को सभी सवर्ण संगठन एक साथ मिलकर जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपेंगे। चेतावनी दी गई कि यदि ज्ञापन पर कोई न्यायोचित कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को जिला स्तर से बढ़ाकर प्रदेश के सभी तहसीलों, सभी जिलों और फिर राष्ट्रीय स्तर पर ले जाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी धरना दिया जाएगा। जब तक यू जी सी कानून को वापस नहीं लिया जाता और आरक्षण की समीक्षा का आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रेस वार्ता में 2027 के चुनाव पर पूछे गए सवाल पर पदाधिकारियों ने कहा कि यदि सरकार ने हमारी मांगें नहीं मानी तो इसका असर निश्चित रूप से 2027 के विधानसभा चुनाव पर भी पड़ेगा। बैठक में मुख्य रूप से प्रदेश अध्यक्ष पं कौशल किशोर अवस्थी प्रदेश महामंत्री धीरेंद्र सिंह मंडल अध्यक्ष महेन्द्र तोमर जिलाध्यक्ष संजीव मिश्रा महामंत्री दिनेश पाण्डेय सहित काफी संख्या में पदाधिकारी मौजूद रहे।












